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सविता चाची की कामवासना

  सविता चाची की कामवासना पूरा किया

दोस्तो, मैं राज एक बार फिर आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई कि आप सबने मेरी पहली कहानी किराएदार और उसकी बेटी की काफी सराहना की और इसी के कारण मैं आप के सामने एक बार हाज़िर हूँ एक नई कहानी लेकर। आशा करता हूँ कि आप सब इसे काफी पसन्द करेंगे।

मेरे बड़े चाचा की शादी को 3 साल हो गए हैं। मेरी सविता चाची उत्तर प्रदेश की हैं, और काफ़ी सुन्दर हैं। उनकी फिगर किसी हिरोइन से कम नहीं है और जब से वो मेरे घर में आई, तभी से मेरा लण्ड उनकी योनि में घुसने के लिए काफ़ी परेशान रहने लगा। मैं कभी-कभी उनकी योनि की कल्पना करके मुट्ठ भी मारने लगा। यह सिलसिला काफ़ी दिनों तक चला। पर एक दिन ऐसा आया जिसके कारण मेरी दिली तमन्ना पूरी हो गई।

हुआ यूँ कि एक बार सविता चाची अपने मायके गई हुईं थीं और काफ़ी दिनों तक वहाँ रहीं। चाचा की नौकरी दूसरे जिले में होने के कारण वो भी बाहर ही थे और सविता चाची को वापस लाने के लिए पापा ने मुझे ही कहा। मैं सविता चाची को लेने के लिए उनके मायके गया। वहाँ मेरा काफ़ी स्वागत-सत्कार हुआ।

जब मैं उनके घर पहुँचा तो सविता चाची नहा रहीं थीं। बाथरूम घर के अन्दर ही था। बाथरूम के ठीक बाहर मैं कुर्सी पर बैठा था। कुछ ही देर में बाथरूम का द्वार खुला। मैंने उन्हें देखा तो मेरी नज़रें उन्हें देखती ही रह गईं। क्योंकि वो उस वक्त केवल पेटीकोट में थीं। उन्हें पता नहीं था कि बाहर कोई बैठा है। उन्होंने मुझे देखते ही दरवाजा बन्द कर लिया, फिर कुछ देर में पूरे कपड़े पहन कर बाहर निकलीं।

मुस्कुरा कर मुझसे पूछा- अरे अकाश, आप कब आए?

‘अभी आधा घण्टा पहले’- मैंने उत्तर दिया।

फिर उन्होंने मुझे खाना खिलाया और आराम करने के लिए मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया। मैं छत पर सोने के लिए चला गया। बिस्तर पर पड़ते ही मुझे वह क्षण याद आया जब सविता चाची नहाकर निकलीं थीं। उसी क्षण को याद करके मैंने मुट्ठ मारी और कुछ ही देर में सो गया।

शाम को करीब चार बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि सविता चाची मेरे सामने खड़ी हैं और मुस्कुरा कर कहती हैं- अरे अकाश, उठो शाम हो गई है।’ मैं तुरंत उठकर खड़ा हो गया, और तैयार होने लगा। इतने में सविता चाची ने कहा- अरे अकाश, यह चादर में अकड़न कैसी है?’ मैं घबरा गया, पर वह मुस्कुरा कर नीचे चली गईं।

मैं समझ गया कि सविता चाची को सब पता चल गया है। कुछ देर बाद मैं भी नीचे चला आया। सविता चाची ने नाश्ता दिया। कुछ देर बाद सविता चाची ने कहा- चलिए मैं आपको गाँव का मेला दिखा लाती हूँ।’

मैं तैयार हो गया। सविता चाची और मैं मेले की ओर चल पड़े। रास्ते में सविता चाची के खेत पड़ते थे जो कि काफ़ी दूर तक फैले हुए थे। वहीं पर एक झोपड़ी भी थी। मैंने पूछा कि ये झोपड़ी किसकी है, तो सविता चाची बोलीं कि मेरे पिताजी की। वो कभी-कभी यहाँ रात में सोते हैं। हम झोपड़ी की ओर बढ़ गए क्योंकि हम कुछ थक गए थे।

वहाँ पड़ी चारपाई पर मैं लेट गया और सविता चाची मेरे पास बैठ गईं। कुछ ही देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि वो रो रही हैं। मैंने उठकर देखा तो उनकी आँखों से आँसू गिर रहे थे। मैंने चौंक कर उनसे पूछा तो उन्होंने कहा- क्या बताऊँ अकाश, जबसे मेरी शादी आपके चाचा से हुई है, ऐसा लगता है कि जैसे मेरी क़िस्मत ही फूट गई है।’

‘कैसे?’- मैंने कारण जानना चाहा।

‘एक औरत अपने पति से क्या चाहती है… प्यार। लेकिन मेरी किस्मत में तो प्यार है ही नहीं। आपके चाचा हमेशा बाहर ही रहते हैं जिस कारण से मेरे प्यार करने की चाह पूरी नहीं हो पाती है। अब आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ?’

‘ये आप कैसी बातें कर रहीं हैं?’

‘क्यों, अपने चाचा की बुराई सुनी नहीं जाती। अगर ऐसा है तो तुम ही मेरी इच्छा पूरी क्यों नहीं कर देते!’

‘ये आप क्या कह रहीं हैं? कैसी इच्छा पूरी करूँ मैं? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।’

सविता चाची ने तब मुस्कुराते हुए कहा- अच्छा, अभी तो अंजान बन रहे हो, पर चादर में जो अकड़न थी, वो मुझे पता है कि वह कैसे हुआ था। अरे अकाश अपने लंड का पानी बेकार में क्यों बहा रहे हो? उसे उसकी सही जगह में बहाओ।’

‘अभी तो सही जगह मिली ही नहीं, तो मैं क्या करूँ?’- मैंने तपाक से कहा।

‘चलो, अब मैं आपको सही जगह बता देती हूँ। आप अपना पानी इस योनि में बहाओ’ यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी योनि के ऊपर रख दिया। उसमें से पहले से ही गरम पानी निकल रहा था, जिससे मेरा हाथ गीला हो गया। सविता चाची ने अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था।

अब सविता चाची ने मेरे पैंट की ज़िप खोल दी और मेरे तन्नाए हुए लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया जो कि साँप की तरह फुँफकार रहा था। उसे उन्होंने तुरन्त अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मुझे मजा आने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड ने अपना पानी गिराना चाहा तो मैंने सविता चाची को कहा कि अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दे। लेकिन उन्होंने चूसने की गति और बढ़ा दी, जिससे मेरा पानी उनके मुँह में ही गिर गया, जिसे सविता चाची ने बड़े चाव से गटक लिया।

उन्होंने अब भी मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकाला, और चूसती रहीं। कुछ देर में मेरा लंड वापस तैयार हो गया। फिर सविता चाची ने मुझे खड़ा किया और ख़ुद चारपाई पर चित्त लेट गईं और कहा- अब चोद दो अकाश। अब मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। मेरी योनि की खुजली मिटा दो।’

मैंने अपने लंड को सविता चाची की योनि की छेद पर रखकर एक क़रारा झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड सविता चाची की योनि को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। सविता चाची चिल्लाई- अअअअआआआआआ… मरी… मेरे… रा…जाआआआ…

मैंने पूछा- ‘क्या हुआ सविता चाची?’

तो उन्होंने कहा- आज पहली बार, इतना मोटा लंड मेरी योनि में घुसा है, दर्द हो रहा है।’

‘अब क्या करूँ, बाहर निकाल लूँ?’

‘नहीं… मेरी चूचियों को चूसो।’

मैंने ऐसा ही किया। कुछ ही देर में सविता चाची ने अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी। मेरी समझ में आ गया कि अब सविता चाची तैयार हैं। मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी के साथ सविता चाची की ठुकाई करने लगा। वह भी नीचे से अपनी गांड उछाल-उछाल कर मेरा साथ देने लगी। मुझे काफ़ी मजा आ रहा था और सविता चाची भी बड़े मज़े से अपनी ठुकाई करवा रहीं थीं।

कुछ देर के बाद सविता चाची ने अपनी गांड उछालने की रफ़्तार को और बढ़ाया और कहा- ‘अब मैं झड़ने वाली हूँ। और तेज़ अकाश, और तेज़। आज तो मैं निहाल हो जाना चाहती हूँ… चोदो मेरे राजा… चोदो… फाड़ दो मेरी योनि को… भुर्त्ता बना दो इस मादरचोद का।’

मैंने अपनी गति और भी बढ़ा दी और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरे लंड को सविता चाची ने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं तो मैंने पूछा- अब क्यों चूस हो रही हो मेरा लंड?’

‘अभी ठुकाई पूरी कहाँ हुई है, अभी तो मेरी गांड भी प्यासी है, उसे कौन मारेगा?’- सविता चाची ने समझाया।

‘ठीक है, चलो, अब कुतिया बन जाओ, मैं तुम्हारी गांड मारने के लिए तैयार हूँ।’

वह तुरंत कुतिया बन गई और मैं उसके पीछे आ गया और उसकी गांड में पहले थूक लगाई, फिर गांड को फैलाकर अपना लंड उसकी गांड की छेद पर रखकर एक धक्का मारा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया। वह चीख पड़ी, पर मैंने कोई रहम नहीं किया और एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया। मेरा लंड पूरा का पूरा जड़ तक उसकी गांड में घुस गया। फिर मैंने तेज़ी के साथ उसकी गांड मारनी शुरु कर दी।

कुछ देर के बाद उसने भी अपनी गांड को आगे-पीछे करना शुरु कर दिया। मैंने करीब 10 मिनट तक उसकी गांड मारी और अपना पानी उसकी गांड के अन्दर ही गिरा दिया, फिर हम एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। करीब एक घण्टे के बाद हमारी नींद खुली तो हम तैयार होकर घर की ओर वापस चले आए।

उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता मैं सविता चाची की ख़ूब ठुकाई करता।

आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल कीजिए।

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