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पड़ोसन आंटी को घोड़ी बनाकर गांड चुदाई

पड़ोसन आंटी को घोड़ी बनाकर गांड चुदाई 

हेलो फ्रेंड्स, मैं सुधीर यूपी वाला फिर हाज़िर हूं दूसरी कहानी लेकर!

यह बात आज से 1 साल पुरानी है जब हमारे मकान में एक किरायदार रहने के लिए आए थे। में उन्हें अंकल और आंटी कहता था। धीरे धीरे उनसे अच्छे सम्बंध बनते गये और मैं उनके करीब पहुंचता गया।

आंटी का पति तो ज़्यादातर तौर पर बाहर ही रहता था। एक दिन यूँ हुआ कि आंटी के पति गये हुए थे और मेरे घर वाले भी आउट ऑफ मुंबई गये थे और कमरे की चाबी आंटी को दे गये, मुझे घरवालो ने फोन कर के बता दिया था की चाबी आंटी के पास है।

मैं घर पे आया और सीधा आंटी के कमरे की बेल बजाई तो आंटी निकली उस वक़्त उन्होंने क्रीम रंग का गहरे गले सूट पहन रखा था और सिर पे दुपट्टा भी नहीं था। वैसे आंटी का फिगर 36 32 36 होगा, ब्रा इतनी टाइट पहन रखी थी कि मुमे बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे थे।

मैंने कहा- आंटी चाबी चाहिए!

तो आंटी ने कहा- अंदर आ जाओ! मैं चाबी लाती हूं!

इत्तफ़ाक़ से क्या हुआ कि आंटी चाबी रख कर भूल गई। आंटी थोड़ी देर बाद आई और मुझसे कहा कि चाबी तो पता नहीं कहाँ रख कर भूल गई मैं?

मैंने कहा- आंटी, चाबी तो चाहिए… नहीं तो मैं रात को कहाँ पर लेटूंगा?

तो आंटी ने कहा की ठीक है, मैं और अच्छी तरह से एक बार और देख लूँगी। यह कह कर वो सोफे पर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी और फ़्रिज़ में से पेप्सी निकाल कर ले आई। मुझे आंटी ने पेप्सी दी लेकिन खुद नहीं ली।

इस पे मैंने कहा- आप भी लो।

आंटी ने कहा की नहीं मैं नहीं लूँगी मेरे सर में दर्द हो रहा है सुबह से।

तो मैं आंटी के पास उठ कर गया और मैंने कहा कि मैं आपका सर दबा देता हूं आंटी!

वो मना करने लगी कि नहीं तुम तक़लीफ़ मत करो मैं दवाई ले लूँगी तो मैंने कहा- आंटी क्या मुझे इतना भी हक़ नहीं है कि मैं आपका सर दबा सकूं?

मेरे जोर देने पर आंटी मान गई। मैं सोफे पर चढ़ कर आंटी का सर इस अंदाज़ से दबा रहा था कि आंटी की रीड की हड्डी मेरे लंड से छू रही थी।

मेरा लंड आंटी के स्पर्श से ही फ़नफना गया और ऊपर से आंटी के कमीज़ का गला गहरा था जिसके कारण उनकी चूची ऊपर से साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं धीरे धीरे सर दबा रहा था। आंटी मदहोश सी होती जा रही थी।

फिर क्या था मैंने आंटी को अपनी आगोश में ले लिया और वहीं सोफे पर लेट गया तो आंटी ने एकदम से उठ कर कहा कि यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने आंटी से कहा कि आंटी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं आपसे बहुत बहुत प्यार करता हूं, तो आंटी ने इतरा कर कहा कि वाह जी वाह! बड़ा आया प्यार करने वाला प्यार करने वाले इतनी देर नहीं लगाते हैं!

मैंने जो देखा तो आंटी की सलवार नीचे खुली पड़ी थी। मुझे ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं लग गया अपने काम पर।

पहले तो मैंने आंटी के होंठों को चूस चूस कर लाल कर दिया फिर उसके बाद मैंने कहा आंटी से कि आंटी! कभी लंड का भी स्वाद चखा है तुमने?

तो कहने लगी- छी! मुझे तो घिन आती है!

मैंने कहा- घिन किस बात की? अरे यह तो बाहर के देशों में खूब जम के होता है वो लोग तो पहले लंड ही चूसाते हैं और अगर बिना लंड चूसाए वो चोदेंगे तो उनका खड़ा ही नहीं होगा।

तो आंटी ने कहा- जैसे भी हो मैं नहीं चूसूंगी!

मैंने कहा- ठीक है आज नहीं तो कल पता चलेगा इसके ज़ायके का!

तो मैं खड़ा हुआ। लंड तो खड़ा ही था, मैंने अपनी पैन्ट खोली, लंड निकाला, मेरा लंड तकरीबन 6 इंच लंबा है और 2।5 इंच मोटा है आंटी मेरा लंड देख कर चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कुराहट ला कर बोली तुम्हारा लंड तो बहुत तगड़ा है!

मैंने कहा- अरे खाते पीते घर का है ऐसे वैसे थोड़ी ना है!

मैं आंटी के पास जा कर खड़ा हो गया और आंटी भी खड़ी थी। मैंने खड़े ही खड़े आंटी की बुर पर हाथ फेरा और आंटी इतनी उतावली थी कि उसने आव देखा ना ताव, फटाफट लंड को अपनी बुर में डालने के लिए कहने लगी।

मैं खड़े खड़े ही उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश कर रहा था मगर मेरी कोशिश नाकाम हो गई। वहीं एक कुर्सी रखी थी। मैं कुर्सी पर बैठ गया। मैंने कहा आंटी से कि अब आओ मेरे ऊपर, तो आंटी एकदम मेरे पास आ कर मेरे लंड पर बैठ गई और अपनी गांड हिलाने लगी।

थोड़ी देर बाद मेरे झड़ने का टाइम आया तो मुझे याद आया कि आंटी ने कहा था कि अन्दर मत झड़ना दिक्कत हो जाएगी मैंने झट से अपना लंड बुर में से निकाला और दीवार पर पिचकारी छोड़ दी।

उस दिन आंटी और मैंने जम कर 5 बार ठुकाई की। यह सिलसिला 4 महीने तक चलता रहा।

जब भी मुझे और आंटी को मौका मिलता हम लोग जम के ठुकाई करते थे। मगर 2 महीने पहले आंटी ने अपना घर बदल लिया क्योंकि उनके पति को गाड़ी पार्क करने की दिक्कत थी। उन्होंने ऐसी जगह घर ले लिया जहा पार्किंग का हिसाब ठीक था।

अब 15 20 दिन मे एक-आध बार ठुकाई का मौका मिलता है तो हम लोग काम कर लेते है नहीं तो वो अपने घर में अपने घर!

मेरी अपनी राय यह है औरतो के बारे में कि औरत के कभी भी साथ सेक्स करो तो उन्हें पूरी तरह नंगा मत करो क्योंकि नंगी औरत कभी भी अच्छी नहीं लगती एक परदा होना चाहिए जो सेक्स को बढ़ाए!

जैसे मैंने जब भी आंटी की बुर मारी मैंने कभी भी उनके पूरे कपड़े नहीं उतारे कभी उनको ब्रा में चोदा कभी सूट पहने ही पहने सूट को उपर करके उनके चूचियों को चूसा। कभी साड़ी का पेटीकोट उपर करके बुर मारी

सबसे ज़्यादा मज़ा आता है साड़ी में बुर मारने का! साड़ी को उतारो, पेटीकोट के नीचे से पेंटी को उतारो, पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर खड़े खड़े बुर मारो, गोदी में उठा कर बुर मारो, कितना आनंद आएगा

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